मानव जीवन अमूल्य है। इस अमूल्य निधि की रक्षा पानी के अभाव में मुश्किल है। हर प्राणिमात्र के लिए पानी जरुरी साध न है। पानी के लिए सभी तरफ त्राही-त्राही मची है। इस विकट समस्या से निपटने के लिए सभी वर्गों संस्कार का सहयोग आवश्यक है। इस भयंकर समस्या से हम निम्न पहलुओं पर चलकर समाधान करने में समर्थ हो सकते है:-
१. वर्षा के पानी को किसी भी प्रकार से पुनः जमीन में जाने का उपाय करें। इस उपाय से पानी हमें अधिक मिलता रहेगा। हेंडपम्प व नलकूपों से भी अधिक पिने व सिचाई वास्ते पानी उपलब्ध हो सकेगा।
२. जिस पानी को नहाने के लिए प्रयोग किया जाए उस पानी को गली में बिखरने से रोक कर, उस पानी को पेड़ पौधो में डालकर पेड़ों पौधों के जीवन की रक्षा करें। जिसे वे हमें उत्तम प्राण वायु प्रदान करते रहें और पर्यावरण शुद्धि भी होती रहे।
३. रसोईघर के पानी को भी इक्टठा कर सिचाई अथवा जमीन में वापिस जाने का प्रबन्ध करें।
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४. जब हम दांतुन आदि करते हैं तो नल से किसी बटन में पानी लेकर अपने दैनिक कार्य को निपटाए अथवा नल को उसी समय खोले जब पानी की आवश्यकता हो बिना आवश्यकता नल बन्द रखें। इससे पानी को बचाया जा सकता है।
५. अनावश्यक पानी को न बिखराएं। अपने स्वार्थ को त्याग कुछ परमार्थ क मार्ग भी अपनाए इससे सभी का भला होगा।
६. . आप जब भी कपड़ों की धुलाई करें तो उस वक्त कम से कम पानी को व्यवहार में आए पानी को सिचाई, पेड़ पौधों की सिचाई अथवा जमीन में वापिस जाने का प्रबन्ध करें।
७. वर्षा के पानी को पीने हेतु अथवा अन्य कार्य हेतु इक्टठा करके उपयोग में लाएं किसी भी अवस्था में उसे गलियों में बिखरने न दें। पुराने पानी संग्रह तरीकों को अपनाकर भविष्य सुरक्षित करें।
यदि आप लोगों ने पानी को न बचाया और योंही अनाप शनाप बिखरते रहे तो आप का कल नहीं आने पाएगा। पानी है तो कल का जीवन है। आप अपने जीवन के साथ-साथ भावी पीढियों को भी जीने का हक़ प्रदान करें। भविष्य कंटिला हैं इस मार्ग अकंटक रहित तभी बना पाओगे जब पानी की सुरक्षा हेतु आप स्वयं जागृत होकर दूसरों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनोगें। तो आइए आज ही हम सब मिलकर यह प्राण लें कि किसी भी कीमत पर पानी को बेकार नहीं जाने देंगे। सरकार इस कार्य में आपकी मदद करें या न करें किन्तु आपने अपने जीवन के अमूल्य धन को बचाने के लिए जी जान से जूट जाए तभी विश्व का कल्याण सम्भव है। - वनौषधि-माला
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