श्रीमती सोनिया गान्धी की अध्यक्षता में बनाई गई राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NAC) द्वारा तैयार किया गया प्रस्तावित ‘साम्प्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक’ यदि संसद द्वारा पारित कर दिया गया तो मुस्लिम, ईसाई आदि अल्पसंख्यक समूहों को हिन्दुओं के प्रति घृणा फैलाने, हिन्दुओं को प्रताड़ित करने और हिन्दू महिलाओं से बलात्कार करने के लिए प्रोत्साहन मिल जायेगा।
इस प्रस्तावित कानून का मन्तव्य यह है कि-
1. यदि बहुसंख्यक वर्ग अर्थात् हिन्दू किसी अल्पसंख्यक समूह के प्रति घृणा फैलाएं या हिंसा करें या यौन उत्पीड़न करें तो हिन्दुओं को दण्डित करने का प्रावधान है। किन्तु मुस्लिम, ईसाई आदि अल्पसंख्यक समूहों द्वारा हिन्दुओं के प्रति घृणा फैलाई जाये या हिंसा की जाये या बलात्कार आदि यौन शोषण किया जाये तो उन अल्पसंख्यकों को किसी प्रकार का दण्ड देने का कोई प्रावधान नहीं है।
2. इतना ही नहीं यदि कोई अल्पसंख्यक उपरोक्त अपराधों के लिये किसी बहुसंख्यक व्यक्ति या संगठन के विरुद्ध शिकायत करता है, तो उसकी जांच किये बिना ही उस व्यक्ति एवं संगठन को अपराधी मानकर उसका संज्ञान लिया जायेगा। इस अपराध की असत्यता सिद्ध करना अपराधी का दायित्व होगा। शिकायतकर्ता की पहचान गुप्त रखी जायेगी।
3. ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस विधेयक में ‘समूह’ की परिभाषा में केवल धार्मिक या भाषाई अल्पसंख्यक वर्ग ही हैं। बहुसंख्यक वर्ग के लिए समूह शब्द का प्रयोग नहीं है और केवल समूह के विरुद्ध घृणा, हिंसा आदि किया गया अपराध ही अपराध माना जायेगा।
4. इस प्रस्तावित विधेयक में यह मान लिया गया है कि साम्प्रदायिक हिंसा केवल बहुसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा ही पैदा की जाती है और अल्पसंख्यक समुदाय कभी ऐसा नहीं करते। अतः बहुसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के खिलाफ किए गए साम्प्रदायिक अपराध तो दण्डनीय हैं, परन्तु अल्पसंख्यक समूहों द्वारा बहुसंख्यक समुदाय के खिलाफ किए गए ऐसे अपराधों के लिए दण्ड देने का प्रावधान इस बिल में नहीं है।
5. अतः अल्पसंख्यक समुदाय का कोई भी सदस्य इस कानून के तहत बहुसंख्यक समुदाय के विरुद्ध किए गए किसी अपराध के लिए दण्डित नहीं किया जा सकता। केवल बहुसंख्यक समुदाय का सदस्य ही ऐसे अपराध कर सकता है और इसलिए इस कानून का विधायी मन्तव्य यह है कि केवल बहुसंख्यक समुदाय के सदस्य ही ऐसे अपराध कर सकते हैं। अतः उन्हें ही दोषी मानकर दण्डित किया जाना चाहिए।
6. किसी अल्पसंख्यक ने रोजगार या किराये पर घर मांग लिया तो बिना योग्यता या अनुकूलता का विचार किये आप यदि हाँ नहीं कहेंगे तो आप अपराधी होंगे।
7. पुलिस व प्रशासन अल्पसंख्यकों का कवच बन जायेगी। कहीं भी अल्पसंख्यकों के विरुद्ध उपरोक्त कोई भी अपराध होता है, तो प्रशासन की भी समान जिम्मेदारी बनेगी। इस प्रकार प्रशासन अपने को बचाने के लिए निर्दोष हिन्दुओं को प्रताड़ित करेगा। परन्तु यदि हिन्दुओं के प्रति उपरोक्त अपराध होता है तो प्रशासन को परेशान होने की कोई आवश्यकता नहीं रहेगी।
8. इस विधेयक के अनुसार एक सात सदस्यीय राष्ट्रीय प्राधिकरण होगा, जिसमें कम से कम चार (अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित) सदस्य ’समूह’ अर्थात् अल्पसंख्यक समुदाय के होंगे, जिससे यह निश्चित है कि बहुसंख्यक समुदाय के सदस्य अल्पमत में होंगे।
इस विधेयक को नया प्रारूप देने वाले NAC के परामर्श दल के सदस्य मुख्य रूप से अबू साहेल शरीफ, असगर अली इंजीनियर, कमाल फारूखी, मंजूर आलम, मौलाना नियाज फारुखी, शबनम हाशमी और सैयद शाहबुद्दीन आदि मुसलमान व जॉन दयाल, राम पुनियानी, सिस्टर मैरी स्कारियां आदि ईसाई हैं। इस परामर्श दल के अतिरिक्त एक प्रारूप समिति है जिसमें तीस्ता जावेद सीतलवाड, नजमी वजीरी, पी.आई.जोंस, प्रसाद सिरीवेला आदि हैं। परामर्श दाता व प्रारूप समिति के संयुक्त संयोजक हर्ष मन्दर व फारिया नकवी हैं। यह ऐसा ईसाई-मुस्लिम गठजोड़ है, जिसकी हिन्दुत्व विरोधी मानसिकता जगजाहिर है।
अतः इस विधेयक को तैयार करने वाली NAC की मानसिकता से ऐसा प्रतीत होता है कि (हिन्दुओं) बहुसंख्यकों को खलनायक बनाकर देश में साम्प्रदायिकता का नंगा नाच एकतरफा होता रहे और हिन्दू ‘हिन्दू’ न रहें व भारत तार-तार हो जाए।
इस विधेयक में धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव क्यों किया गया? अपराध तो अपराध है, चाहे वह किसी भी वर्ग के व्यक्ति ने किया हो। साम्प्रदायिक अपराध बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक नहीं होते।
ऐसे विधेयक की क्या आवश्यकता है जो धर्म व जाति के आधार पर भेदभाव करके संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को और राष्ट्र की एकता और अखण्डता को खतरे में डालकर आतंकवादियों व अलगाववादियों का कानूनी हथियार बन जाए?
इसके लागू होने से भारत में सम्प्रदायों के बीच आपसी सम्बन्धों में कटुता-वैमनस्यता फैल जायेगी। यह एक ऐसा कानून है जिसके खतरनाक दुष्परिणाम होंगे और इसका दुरुपयोग किया जायेगा तथा शायद इस कानून का प्रारूप तैयार करने के पीछे यही उद्देश्य भी है।
इस विधेयक को तैयार करने वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में सोनिया जी ने चुने हुए ऐसे लोग लिये हैं, जिनका हिन्दुत्व विरोधी भाव सर्वज्ञात है। इस परिषद् को विधेयक तैयार करने का अधिकार किसने दिया? जब इस परिषद की संविधान व कानून में कोई व्यवस्था नहीं है तो फिर इसकी वैधानिकता क्या है? श्रीमति सोनिया गान्धी कांग्रेस से बड़ी हो सकती हैं, परन्तु संविधान व देश से बड़ी नहीं। - डॉ. कैलाशचन्द्र
इस विधेयक का प्रारूप (ड्राफ्ट) जनता के विचारों हेतु वेबसाइट पर उपलब्ध है। सभी से प्रार्थना है कि अपने-अपने स्तर पर निम्नलिखित पते पर मेल/चिट्ठी भेजकर अपने विचारों से सरकार को अवगत करायें और समाज में भी इसका प्रचार करके राष्ट्ररक्षा में अपना योगदान सुनिश्चित करें-
E-mail : wgevb@nac.nic.in
Secretary, National Advisory Council, 2 Motilal Nehru Place
Akbar Road, New Delhi-110011
http://nac.nic.in/communal/com bill.htm
Anti Hindu Black Law | Smt. Sonia Gandhi | National Advisory Council | Communal Violence Prevention Bill | Hate Against Hindus | Oppressed Hindus | Provision of Punishing Hindus | Tortured Innocent Hindus | Anti Hindutva Mentality | Orgy of Sectarianism | Unity and Integrity of the Nation | Dr. Kailash Chandra | Vedic Motivational Speech in Hindi by Vaidik Motivational Speaker Acharya Dr. Sanjay Dev for Machalpur - Khamaria - Ganaur Sonipat | News Portal - Divyayug News Paper, Current Articles & Magazine Machhiwara - Virupakshipuram - Gohana Sonipat | दिव्ययुग | दिव्य युग


